IAS FAIL -- Pustak Samiksha : Atulya Khare
Pustak Samiksha : Atulya Khare
IAS
फ़ेल
द्वारा:
श्वेत कुमार सिन्हा
विधा
: उपन्यास
ज्ञान
गंगा प्रकाशन द्वारा प्रकाशित
प्रथम
संस्करण: 2025
मूल्य
: 300
पाठकीय
प्रतिक्रिया क्रमांक : 161
श्वेत
कुमार सिन्हा जी का यह दूसरा उपन्यास मेरे
हाथ में है, इसके पहले “बदचलन” लिख चुके हैं
जिसे अच्छा प्रतिसाद प्राप्त हुआ एवं विभिन्न मंचों पर सराहा गया तथा पुरस्कृत भी किया
गया है । प्रस्तुत उपन्यास भी विशेष तौर पर युवा वर्ग के बीच काफी
सराहा जा रहा है , जिसका शीर्षक आकर्षित करता है एवं भाव , लेखन, भाषा शैली, वाक्य
विन्यास आदि की दृष्टि से भी अच्छा प्रस्तुतीकरण है।
कथानक
मुखर्जी नगर दिल्ली और आईएएस परीक्षा
की तैयारी , प्रतिभागियों की परेशानियाँ, उनके
रोज रोज के नए नए तजुर्बे से आगे बढ़कर विषय में एक नया पन लाते हुए ,अधिकतम अवसरों
में भी परीक्षा उत्तीर्ण न कर पाने और प्रतिभागी के IAS फेल
के लेवल के साथ वापस अपने शहर लौट आने से शुरू किया गया है जिसमें ट्रेन में शुरू
हुई छोटी सी मुलाकात के बीच उपजी और फिर आश्चर्यजनक रूप
से पनप गई प्रेम कहानी जो की शादी की परवान चढ़ने के पहले ही समाप्त हो गई ,क्षेत्र
विशेष में ऊंची नीची जाति के बीच रिश्ते न
होने की समाज की मानसिकता को दिखलाते हुए समाज में विधवा के हालात को भी बेहतर प्रस्तुति
के साथ रखने में कामयाब हुए हैं। उन पहलुओं को उजागर किया गया है जो आम तौर पर इस तरह
के कथानक के बीच नहीं देखे जाते । विभिन्न सामाजिक समस्याओं को सामने लाया गया है
। एवम प्रस्तुतिकरण का तरीका भी रोचक है ।
श्वेत
कुमार जी अपने पूर्व प्रकाशित उपन्यास “बदचलन”
की ही तरह इस पुस्तक के माध्यम से भी सामाजिक बुराइयों को प्रस्तुत करते नजर आए।
कथानक
का प्रारंभ अवश्य ही प्रतिष्ठित IAS परीक्षा फेल
होने से हुआ किंतु आगे चल कर कहानी कुछ अलग ही दिशा ले लेती है । शीर्षक को देखते
हुए यदि अपनी कहूं तो मुझे उम्मीद थी किसी असफल उम्मीदवार प्रतिभागी के संघर्ष एवम
अंततोगत्वा सफलता हासिल कर लेने जैसी कहानी होगी किंतु यहां लेखक अपने को कथानक के
शीर्षक के मूल भाव से न बांधे रख कर तथा
इस विषय के अलावा अन्य विषयों पर अधिक फोकस करते दिखे एवं कहानी असफल IAS प्रतिभागी की न होकर एक महिला के
प्रारंभिक वैवाहिक जीवन की मुश्किलों की, पति की अकाल मृत्यु के पश्चात संघर्ष की एवम उस पर और भी तड़का लगाती हुई
उस महिला की पूर्व पति से हुई बेटी की उसी के देवर द्वारा अपहरण की कहानी बन कर रह
गई, जहां पुनः देवदूत के समान उसका IAS फ़ेल प्रेमी
प्रकट होकर उसकी सभी मुश्किलों का अंत कर देता है । कहानी मनोरंजन
कि दृष्टि से ठीक है किंतु विषय वस्तु अधिक प्रभावित नहीं करती तथा कह सकते हैं की
एक अच्छी मसाला कहानी है जिसका अंत
सुखांत रखा जा सकता था ।
अतुल्य खरे
अपनी विशिष्ठ शैली के कारण श्वेत कुमार सिन्हा जी ने अपनी अलग पहचान बनाई है
उनके उपन्यासों से गुजरते हुए आप निश्चय ही उनकी लेखन शैली से प्रभावित होंगे
उनकी द्वारा सृजित अन्य कृतियों की समीक्षा के लिंक यहाँ दिए गए हैं ।
पुस्तकों की समीक्षा पढ़ें फिर उपन्यासों का आनंद लें-
pustak Samiksha : Atulya Khare


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